बड़ी खबर : अमेरिका -ईरान युद्ध के बीच भारत ने भी शुरू की तैयारी बह्मास्त्र हुए तैनात ,यह मिशाइल -ड्रोन का बनेगा काल। आखिर कौन सा और कैसे ? Tap कर जाने

बड़ी खबर : अमेरिका -ईरान युद्ध के बीच भारत ने भी शुरू की तैयारी बह्मास्त्र हुए तैनात ,यह मिशाइल -ड्रोन का बनेगा काल। आखिर कौन सा और कैसे ? Tap कर जाने


( एजेंसी / ब्यूरो ,न्यूज़ 1 हिन्दुस्तान )
नई दिल्ली। ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चल रहे महायुद्ध ने दुनियाभर को नई चिंता में डाल दिया है।  ऐसे में भारतीय सेना ने भी पाकिस्तान और चीन से सटी अपनी सीमाओं पर अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है।  भारत यहां अपने दो देसी ब्रह्मास्त्र तैनात कर रहा है, दो दुश्मन के छोटे मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही खत्म कर देंगे। 
क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रही है ? ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चल रहे महायुद्ध ने इस चिंता को बढ़ा दिया है।  इस वैश्विक तनाव और पाकिस्तान-चीन सीमा पर बढ़ते खतरे के बीच भारतीय सेना ने अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है। 
 सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना ने एक और पिनाका रॉकेट लॉन्चर रेजिमेंट को ऑपरेशनल कर लिया है और इस साल के अंत तक एक और रेजिमेंट को शामिल करने की तैयारी में है।  इससे सेना के पास अब 7 पिनाका रेजिमेंट हो गए हैं, जो पाकिस्तान और चीन सीमा पर तैनात हैं। 
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट ने रक्षा सूत्रों ने हवाले से बताया गया है कि पिनाका के आठवें रेजिमेंट के लिए अब आधे से ज्यादा उपकरण प्राप्त किए चुके हैं और 2026 के अंत तक पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा।  अगले साल दो और रेजिमेंट को शामिल करने की योजना है, जिससे कुल संख्या 10 हो जाएगी।  भारतीय सेना का लक्ष्य 22 पिनाका रेजिमेंट बनाने का है, जिसमें नई लंबी दूरी वाली गाइडेड मिसाइलों से लैस संस्करण शामिल किए जाएंगे।  ये पुरानी सिस्टम की जगह लेंगे और छोटे मिसाइल-ड्रोन के हमलों का मुंहतोड़ जवाब देंगे। 
चीन-पाक सीमा पर भारत की कैसी सैन्य तैयारी?
भारत की पाकिस्तान से सटी पश्चिमी सीमा और चीन से सटी उत्तरी सीमा पर हालात लंबे समय से संवेदनशील रही है।  खासतौर पर वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद सेना ने अपनी आर्टिलरी ताकत को तेजी से मजबूत करने का फैसला लिया था।  भारतीय सेना ने तब भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, टाटा पॉवर और लार्सन एंड तुबरो के साथ करीब 2,580 करोड़ रुपये के छह पिनाका रेजिमेंट के लिए समझौता किया था।  अब इनका तेजी से उत्पादन और तैनाती की जा रही है। 
ईरान-अमेरिका जंग के दौरान ड्रोन और मिसाइल स्वार्म अटैक की रणनीति देखते हुए सेना ने पिनाका को और महत्वपूर्ण हथियार मान लिया है।  इस जंग में बड़े पैमाने पर रॉकेट, ड्रोन और प्रिसिजन स्ट्राइक सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है।  यही वजह है कि भारत भी अपनी सेना को ऐसे हथियारों से लैस कर रहा है जो एक साथ कई लक्ष्यों को तेजी से निशाना बना सकें। 
‘देसी ब्रह्मास्त्र’ क्यों कहा जाता है पिनाका?
पिनाका भारत का स्वदेशी मल्टी-बारेल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है, जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है।  इस भारतीय सेना का ‘देसी ब्रह्मास्त्र’ कहा जाता है, क्योंकि यह कम समय में भारी तबाही मचाने की क्षमता रखता है।  यह 122 मिमी रॉकेटों की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली और सटीक है।  पिनाका 12 रॉकेट एक साथ दाग सकता है, और कुछ ही सेकंड में दुश्मन के बड़े इलाके को निशाना बना सकता है. इसकी रेंज 40 से 75 किलोमीटर तक है, जबकि इसके नए गाइडेड वर्जन इससे भी ज्यादा दूर 120 किमी तक तक सटीक हमला करने में सक्षम हैं। 
पिछले दिनों पिनाक रॉकेट सिस्टम के एडवांस वर्जन का परीक्षण किया गया. फोटो- पीटीआई
यह सिस्टम GPS और INS गाइडेंस से लैस है, जिससे सटीकता बहुत बढ़ गई है।  यह सिस्टम खासतौर पर दुश्मन के ठिकानों, बंकर, कमांड सेंटर और आर्टिलरी पोजीशन को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है।  इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी ‘शूट एंड स्कूट’ क्षमता है… यानी हमला करने के तुरंत बाद अपनी पोजीशन बदल लेना, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचा जा सके। 
ड्रोन और ‘छुटकू मिसाइल’ का भी तोड़
आधुनिक युद्ध में छोटे ड्रोन और लो-कॉस्ट मिसाइलें बड़ा खतरा बनकर उभरी हैं।  पिनाका का अपग्रेडेड वर्जन ऐसे लक्ष्यों के खिलाफ भी प्रभावी माना जा रहा है।  इसकी एक रेजिमेंट में 18-24 लॉन्चर होते हैं, जो मिनटों में सैकड़ों रॉकेट दाग सकते हैं।  यह छोटे ड्रोन और क्रूज मिसाइलों के स्वार्म अटैक का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। 
ईरान की तरह दुश्मन अगर सस्ते ड्रोन और मिसाइलों से हमला करे तो पिनाका का सैल्वो दुश्मन के लॉन्चर और कमांड सेंटर को पहले ही नष्ट कर सकता है।  इसकी लागत भी दूसरी हाईटेक मिसाइलों की तुलना में काफी कम है।  इसका एक रॉकेट महज कुछ लाख रुपये में आ जाता है, जबकि दुश्मन की महंगी मिसाइल को रोकने वाले सिस्टम करोड़ों में हैं। 
ईरान-इजरायल संघर्ष ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक नहीं होंगे, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित होंगे, जहां मिसाइल, ड्रोन और रॉकेट सिस्टम अहम भूमिका निभाएंगे।  भारत इसी दिशा में अपनी सेना को तैयार कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का मुकाबला प्रभावी तरीके से किया जा सके। 
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की रणनीति देखते हुए भारत ने सही समय पर कदम उठाया है।  पिनाका की बढ़ती संख्या न सिर्फ रक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि दुश्मन को भी संदेश देगी कि भारत अब किसी भी स्वार्म अटैक का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। 
पिनाका की क्या है खूबियां?

* मल्टी-बैरल लॉन्च सिस्टम – एक साथ 12 रॉकेट दागने की क्षमता, जिससे बड़े इलाके में एकसाथ हमला संभव। 
* तेज फायरिंग क्षमता – कुछ ही सेकंड में पूरा सल्वो (12 रॉकेट) फायर कर सकता है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता। 
* लंबी मारक क्षमता – शुरुआती वर्जन की रेंज 40 किमी तक, जबकि आधुनिक गाइडेड वर्जन 70–75 किमी या उससे अधिक दूरी तक सटीक हमला कर सकते हैं। 
* उच्च सटीकता – नए गाइडेड रॉकेट्स GPS/INS आधारित नेविगेशन से लैस, जिससे टारगेट पर सटीक प्रहार। 
* शूट एंड स्कूट तकनीक – हमला करने के तुरंत बाद पोजीशन बदल सकता है, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचाव। 
* सैचुरेशन फायर क्षमता – एक बड़े क्षेत्र में भारी मात्रा में रॉकेट बरसाकर दुश्मन के ठिकानों, बंकर और सैनिक जमावड़े को नष्ट कर सकता है। 
* मोबाइल और ऑल-टेरेन क्षमता – हाई मोबिलिटी व्हीकल पर लगा होने के कारण पहाड़, रेगिस्तान और कठिन इलाकों में भी आसानी से तैनात। 
* कम समय में तैनाती – सिस्टम को जल्दी से तैयार कर फायर किया जा सकता है, जिससे युद्ध के दौरान तेजी मिलती है। 
* ड्रोन और हल्के लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी – बड़े पैमाने पर फायरिंग के कारण ड्रोन स्वार्म और छोटे मिसाइल सिस्टम को भी निष्क्रिय करने में सक्षम। 
* स्वदेशी तकनीक – पूरी तरह भारत में विकसित, जिससे विदेशी निर्भरता कम और रखरखाव आसान। 
* कम लागत, ज्यादा प्रभाव – अन्य भारी मिसाइल सिस्टम के मुकाबले कम लागत में ज्यादा क्षेत्रीय नुकसान पहुंचाने की क्षमता। 
* भविष्य के अपग्रेड की क्षमता – लंबी दूरी और अधिक सटीक गाइडेड वर्जन विकसित किए जा रहे हैं, जिससे इसकी ताकत लगातार बढ़ रही है। 
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